Jhar Media: HDFC बैंक में 12 करोड़ लोगों के अकाउंट है. 28 लाख करोड़ रुपए जमा है. देश का सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक है . इतने बड़े बैंक के पार्ट टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफ़ा दे दिया तो हड़कंप मच गया. उन्होंने अपने इस्तीफ़े में बैंक के कामकाज पर सवाल उठाए हैं. शेयरों के दाम 52 हफ़्ते में सबसे कम है. हिसाब किताब में समझेंगे कि सच क्या है?
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पहले तो HDFC की कहानी जान लीजिए
Housing Development Finance Corporation (HDFC) की शुरुआत HT पारेख ने 1977 में की थी. मकसद था लोगों को होम लोन देना. पारेख की हिस्सेदारी नाममात्र थी . ICICI ने शुरुआत में पैसे लगाए , बाकी संस्थाओं की भी हिस्सेदारी रही . 1991 में अर्थव्यवस्था खुलने के बाद प्राइवेट बैंकों को फिर मौक़ा मिला. HDFC बैंक की शुरुआत 1994 में हुई. HDFC और HDFC बैंक दोनों कंपनियों ने अपने अपने क्षेत्रों में नाम और पैसे कमाए. HDFC बैंक अपनी प्रमोटर कंपनी HDFC से भी बड़ी हो गई. 2023 में दोनों का विलय हो गया. इसकी ख़ासियत यह है कि कोई प्रमोटर नहीं है, प्रोफेशनल इस कंपनी को चलाते हैं.
अतनु चक्रवर्ती गुजरात कैडर के IAS अफ़सर रहे हैं. वित्त मंत्रालय से रिटायर हुए, 2021 में HDFC बैंक के पार्ट टाइम चेयरमैन बने. उनका दूसरा टर्म चल रहा था. टर्म अगले साल तक था लेकिन उन्होंने अचानक इस्तीफ़ा दे दिया. इस्तीफ़े में लिखा कि बैंक के कामकाज के तरीक़े उनकी नैतिकता और मूल्यों से मेल नहीं खाते हैं. इसके मायने अब तक साफ़ समझ नहीं आए है.
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फिर शुक्रवार को बाज़ार बंद होने के बाद बैंक ने ब्रांच बैंकिंग के ग्रुप हेड समेत तीन बड़े अधिकारियों को निकाल दिया. दुबई और बहरीन ब्रांच में NRI ग्राहकों को AT1 बॉन्ड को FD की तरह सेफ बताकर बेचा गया था. Credit Suisse बैंक का दीवाला निकलने से इनकी वैल्यू जीरो हो गई. ग्राहकों को नुक़सान हुआ. साल भर से जाँच चल रही थी.अब एक्शन हुआ है.
रिजर्व बैंक ने HDFC को स्पेशल कैटेगरी में रखा है. Too big to fail मतलब बैंक में कुछ भी ऊंच नीच नहीं होना चाहिए वरना अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है. रिजर्व बैंक ने भी कहा कि HDFC में सब कुछ ठीक है फिर भी शेयर बाज़ार का मूड ठीक नहीं हुआ. बाज़ार को भरोसा नहीं हो रहा है कि बैंक में सब ठीक है. हालाँकि आँकड़े HDFC बैंक के सेफ़ होने की गवाही दे रहे है.
हर साल ₹60-70 हज़ार करोड़ का मुनाफा हो रहा है
Capital Adequacy Ratio 20% है जबकि RBI का मानक 12% है यानी लोन डूबने की स्थिति में बैंक के पास हर ₹100 के लोन पर ₹20 बफर है. ये बैंक का अपना पैसा है, लोगों के डिपॉजिट का नहीं

Non Performing Assets (NPA) 0.4% है यानी हर ₹100 के लोन में सिर्फ 40 पैसे डूबे हैं.
बाज़ार को इन आँकड़ों का पता है. HDFC बैंक के शेयर पिछले पांच साल के औसत से सस्ता मिल रहा है. पांच साल में इसकी औसत क़ीमत मुनाफ़े के 25 से 27 गुना रही है. अब यह 17-18 गुना हो गई है. फिर भी लोग ख़रीदारी से डर रहे हैं तो उसका कारण है चेयरमैन के इस्तीफ़े में उठाए गए सवाल? बाज़ार इनके जवाब मिलने का इंतज़ार कर रहा है.
हिसाब किताब में अर्थव्यवस्था और कंपनियों के अलावा टेक्नोलॉजी को भी समझने समझाने की कोशिश है.



