मैं हाफिज सईद का शर्मनाक अंजाम अपनी आंखों से देखना चाहता हूंः नूर दाहरी

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हाफिज सईद

New Delhi: पहलगाम नरसंहार के बाद भारत आतंकवादियों के खात्मे को लेकर प्रतिबद्ध है. इस बीच पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का पर्दाफाश करते हुए उसके पूर्व सदस्य नूर दाहरी ने जो खुलासा किया है उससे सनसनी मच गई है. नूर ने कहा है कि कैसे हाफिज सईद ने इस्लाम के नाम पर हजारों युवाओं को मौत के रास्ते पर भेजा. नूर ने पोस्ट में कहा, “मैं हाफिज सईद का शर्मनाक अंजाम अपनी आंखों से देखना चाहता हूं.

वहीं पहलगाम नरसंहार के बाद पाकिस्तान आतंकवाद के मामले पर दुनिया के सामने बेनकाब हो गया है. अब पाकिस्तान में पल रहे आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का एक पूर्व सदस्य सामने आकर उसकी पोल खोल रहा है.
उसका कहना है कि उसने जो कुछ भी देखा, वो इस्लाम के नाम पर किया जा रहा सबसे बड़ा धोखा था. नूर ने साफ कहा है कि वह अपनी जिंदगी में हाफिज सईद का शर्मनाक अंजाम देखना चाहता है.

नूर दाहरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट में अपने आतंकी बनने की कहानी साझा की है. उसने बताया कि उसकी मां चाहती थीं कि वह डॉक्टर बने, लेकिन उसकी जिंदगी की दिशा बदल दी हाफिज सईद की जहरीली तकरीरों ने. यूनिवर्सिटी की पढ़ाई छोड़कर वह लश्कर से जुड़ गया और फिर शुरू हुआ एक डरावना सफर.
नूर ने अपने पोस्ट में बताया कि उसे लश्कर में हाफिज सईद की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी.

वह उसके मुरिदके स्थित स्थायी आवास और संगठन के मुख्यालय की रखवाली करता था. उसने बताया कि हाफिज सईद जिस गाड़ी में चलता था, वह एक नीली टोयोटा वीगो पिकअप डैटसन थी, जिसे पीछे सोने के लिए भी तैयार किया गया था.नूर ने खुलासा किया कि हाफिज सईद के भाषण इतने जहरीले होते थे कि सैकड़ों युवक लश्कर से जुड़ जाते थे और फिर उन्हें ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्तान और भारत के कश्मीर भेज दिया जाता था.

हर गुरुवार को पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों से लगभग 500 युवक अफगानिस्तान के कुनार प्रांत स्थित मआसकर तैयबा नाम के ट्रेनिंग कैंप पहुंचते थे. लेकिन उनमें से अधिकतर कभी लौटकर नहीं आते थे. बताया कि जब वह खुद कश्मीर और अफगानिस्तान गया तो उसे लश्कर का असली चेहरा दिखा. वहां जो कुछ उसने देखा उससे उसकी आंखें खुल गईं. जब उसने वापस लौटकर संगठन से अलग होने की बात की तो उसे डरपोक और गद्दार कहा गया. लेकिन वह लश्कर के झूठ और हिंसा के खिलाफ खड़ा हो गया.

नूर दाहरी का दावा है कि आज भी लश्कर के पास करीब एक लाख ट्रेंड आतंकी हैं. उसका कहना है कि हाफिज सईद ने हजारों पाकिस्तानी युवाओं को झूठे वादों और जन्नत के ख्वाब दिखाकर मौत के रास्ते पर धकेल दिया. उसने कहा कि लश्कर पाकिस्तान की सत्ता के इशारों पर एक ‘राख की जंग’ लड़ रहा है जिसमें केवल मासूमों की जान जा रही है.

नूर दाहरी ने अपनी पोस्ट के अंत में लिखा कि आज वह उस जिंदगी से कहीं बेहतर स्थिति में है जहां हाफिज सईद उसे ले जाना चाहता था. उसका कहना है कि अल्लाह ने उसे इस्लाम के नाम पर हो रहे इस धोखे को उजागर करने के लिए चुना है. वह कहता है कि “मैं अपनी आंखों से हाफिज सईद का गिरता हुआ अंजाम देखना चाहता हूं. इंशा अल्लाह.”

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