Mumbai: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है. शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के बीच संभावित गठबंधन की अटकलों पर उस समय संशय गहरा गया, जब राज ठाकरे ने अपने नेताओं को इस मुद्दे पर चुप्पी साधने का सख्त आदेश दिया.

राज ठाकरे ने अपने सभी पार्टी पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि गठबंधन के मुद्दे पर बिना उनकी अनुमति के कोई भी सार्वजनिक बयान न दिया जाए. उन्होंने कहा कि जब तक वह स्वयं कोई दिशा-निर्देश नहीं देते, तब तक कोई नेता इस विषय पर चर्चा न करे.

यह आदेश ऐसे समय में आया है जब हाल ही में मुंबई के वर्ली स्थित NSCI डोम में आयोजित मराठी जल्लोष मेळावा कार्यक्रम में दोनों ठाकरे भाई एक ही मंच पर नजर आए थे. इस कार्यक्रम के बाद मराठी राजनीति में दोनों दलों के एक होने की अटकलें तेज हो गई थीं. माना जा रहा था कि दोनों भाई मराठी भाषा और मराठी मानुस के मुद्दे पर एकजुट हो सकते हैं.

उद्धव ठाकरे ने इस रैली में नगर निकाय चुनावों का बिगुल बजाते हुए संकेत दिया था कि वे मिलकर बीएमसी और राज्य की सत्ता हासिल करना चाहते हैं. वहीं, राज ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्होंने वह कर दिखाया जो बालासाहेब ठाकरे भी नहीं कर पाए थे—ठाकरे भाइयों को एक मंच पर लाना.

गौरतलब है कि वर्ष 2005 में राज ठाकरे ने शिवसेना से अलग होकर मनसे की स्थापना की थी. अब 20 साल बाद दोनों भाई एक मंच पर आए हैं, लेकिन राज ठाकरे के ताजा आदेश ने इस संभावित गठबंधन को लेकर अनिश्चितता और भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here