Jhar Media: झारखंड में शहर की सरकार चुनने को लेकर राजधानी रांची के मतदाताओं में उत्साह की भारी कमी देखने को मिली। आंकड़े इस बात के गवाह हैं कि रांची नगर निगम क्षेत्र में मतदान प्रतिशत राज्य के औसत से काफी नीचे रहा। शहरी लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में राजधानी के शिक्षित और मध्यम वर्गीय मतदाताओं की यह उदासीनता प्रशासन और राजनीतिक दलों दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई है।

राज्य के सभी नगर निकायों में कुल मिलाकर 61.84 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इसके मुकाबले राजधानी रांची में महज 43.28 फीसदी वोटिंग हुई, जो राज्य के औसत से लगभग 18 प्रतिशत कम है। यह अंतर स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि शहरी मतदाताओं की भागीदारी ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की तुलना में काफी कमजोर रही।

दिलचस्प बात यह है कि जहां राजधानी में मतदान का उत्साह फीका रहा, वहीं सरायकेला नगर पंचायत में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यहां 75 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ, जो लोकतांत्रिक जागरूकता और स्थानीय मुद्दों के प्रति लोगों की सक्रियता को दर्शाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में मतदान कम होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे मतदाताओं का कामकाजी व्यस्तता, स्थानीय निकाय चुनावों को कम महत्व देना, या प्रत्याशियों के प्रति असंतोष। हालांकि, लोकतंत्र की मजबूती के लिए हर स्तर के चुनाव में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

राजधानी रांची में कम मतदान प्रतिशत इस बात का संकेत है कि शहरी लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए प्रशासन, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों को जागरूकता अभियान और जनसंपर्क को और प्रभावी बनाना होगा, ताकि भविष्य में मतदाता अधिक संख्या में अपने मताधिकार का प्रयोग करें।

 

 

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