Ranchi: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार के खजाने से कथित तौर पर ₹10,000 करोड़ की राशि गायब होने के मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए कहा कि सरकार को इस मामले में पारदर्शिता बरतनी चाहिए और जनता के सामने पूरी सच्चाई रखनी चाहिए।
मरांडी ने बयान जारी कर कहा कि वित्त मंत्री द्वारा पहले ही निर्देश दिया गया था कि वित्त सचिव सभी विभागों के सचिवों की बैठक बुलाकर विस्तृत वित्तीय हिसाब लें। लेकिन उनके अनुसार, वित्त सचिव ने मंत्री के निर्देश का पालन करने के बजाय संबंधित फाइल को मुख्य सचिव के पास भेज दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फाइल पिछले तीन महीनों से मुख्य सचिव के पास लंबित पड़ी है और इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार जांच से क्यों बच रही है और फाइल पर निर्णय लेने में इतनी देरी क्यों हो रही है। मरांडी ने कहा कि मुख्य सचिव को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए कि फाइल लंबित रहने के पीछे क्या कारण हैं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मुख्य सचिव पहले से ही जमीन घोटाले के आरोपों का सामना कर चुके हैं। ऐसे में इस मामले में देरी से संदेह और गहरा हो रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं जानबूझकर मामले को दबाने या टालने की कोशिश तो नहीं की जा रही।
मरांडी ने मांग की कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि राशि कहां गई, उसका उपयोग किस तरह हुआ और क्या किसी स्तर पर निजी लाभ उठाया गया। उन्होंने कहा कि सच सामने आना लोकतंत्र और जनता के विश्वास के लिए जरूरी है।



