New Delhi: संसद के निचले सदन लोकसभा में महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े तीन अहम बिलों पर जोरदार बहस जारी है. इन बिलों के जरिए संविधान में संशोधन प्रस्तावित है, जिस पर सदन में विस्तृत चर्चा हो रही है.
पक्ष में पड़े 151 वोट
वोटिंग के दौरान संशोधन के समर्थन में 251 वोट पड़े, जबकि विपक्ष के 185 सांसदों ने इसका विरोध किया. विपक्षी दलों ने बिल के कई प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए सरकार को घेरा.
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कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह “90% बातें दोहरा रही है” और उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि लोकसभा की सीटों की संख्या 850 करने का आधार क्या है.
वहीं, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने मुस्लिम महिलाओं को भी आरक्षण देने की मांग रखी. इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब देते हुए कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना असंवैधानिक है. उन्होंने सपा पर तंज कसते हुए कहा कि “अगर वे चाहें तो अपने सभी टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकते हैं, हमें कोई आपत्ति नहीं है.”
अंतिम वोटिंग 17 अप्रैल शाम 4 बजे
संसद में इन बिलों पर चर्चा के लिए 16 और 17 अप्रैल को कुल 15 घंटे का समय निर्धारित किया गया है. अंतिम वोटिंग 17 अप्रैल को शाम 4 बजे कराई जाएगी.
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, लोकसभा में सांसदों की संख्या बढ़ाकर 850 करने की योजना है, जिसमें 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी. सीटों की सटीक संख्या तय करने के लिए परिसीमन (Delimitation) भी किया जाएगा.
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बिल के तहत 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है, जिसे महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. हालांकि, विपक्ष इस पर कई संवैधानिक और व्यावहारिक सवाल उठा रहा है.
इस मुद्दे पर संसद में जारी बहस आने वाले समय में देश की राजनीति की दिशा तय कर सकती है.



