बिहार का बजट पेश, सीएम नीतीश बोले- खुलेंगे विकास के नए रास्ते

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Patna: बिहार विधानसभा में वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव द्वारा वर्ष 2026-27 का बजट पेश किए जाने के साथ ही राज्य की राजनीति और अर्थव्यवस्था में नई बहस शुरू हो गई है। पिछले कुछ वर्षों से बिहार के बजट का आकार लगातार बढ़ता रहा है और इस बार भी बजट में उल्लेखनीय इजाफा देखने को मिला है। ऐसे में सबकी निगाह इस बात पर टिकी हुई है कि किस विभाग को कितनी प्राथमिकता दी गई है और सरकार अपने वादों को ज़मीन पर उतारने के लिए कितनी गंभीर दिखाई देती है।

हाल ही में विधानसभा चुनाव में एनडीए को भारी बहुमत मिलने के बाद यह कयास पहले से ही लगाए जा रहे थे कि सरकार जनता को राहत देने वाला, विकासोन्मुख और लोकलुभावन बजट पेश करेगी। बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने दावा किया कि बिहार अन्य राज्यों की तुलना में तेज़ी से प्रगति कर रहा है और औद्योगिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का फोकस केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने पर भी है।

इस बजट में हाट विकास को विशेष महत्व दिया गया है। ग्रामीण हाटों को विकसित कर स्थानीय व्यापार, किसानों और छोटे व्यवसायियों को सीधे लाभ पहुंचाने की योजना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताई गई है। इसके साथ ही बुनियादी ढांचे, रोजगार सृजन और सामाजिक कल्याण से जुड़े क्षेत्रों पर भी सरकार के ज़ोर देने की बात कही गई है।

हालांकि विपक्ष ने बजट को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष का कहना है कि जब राज्य में कानून-व्यवस्था और आम लोगों की सुरक्षा जैसे बुनियादी मुद्दे ही संतोषजनक नहीं हैं, तब केवल बड़े-बड़े बजटीय आंकड़े पेश करने से ज़मीनी हकीकत नहीं बदलने वाली। उनका आरोप है कि सरकार आंकड़ों के ज़रिये उपलब्धियां गिना रही है, जबकि आम जनता को अभी भी कई मोर्चों पर संघर्ष करना पड़ रहा है।

कुल मिलाकर, 2026-27 का बजट उम्मीदों और आशंकाओं दोनों के साथ सामने आया है। अब असली परीक्षा इस बात की होगी कि बजट में किए गए वादे कितनी ईमानदारी और प्रभावी ढंग से लागू होते हैं।

 

 

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