EU से समझौते के बाद अमेरिका बैकफुट पर, ड्रंप ने पीएम मोदी को घुमाया फोन और कर ली ये डील

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Jhar Media: भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील आखिरकार पूरी हो गई है, और इसका असर देश की अर्थव्यवस्था से लेकर शेयर बाजार तक साफ दिखाई देने की उम्मीद है. अमेरिका भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है, ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों का मजबूत होना भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक, दोनों ही लिहाज़ से बेहद अहम माना जा रहा है.

इस डील से सबसे बड़ा फायदा भारतीय एक्सपोर्टर्स को मिलने की संभावना है. खासकर टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो कंपोनेंट्स, आईटी और एग्रीकल्चर सेक्टर को नई रफ्तार मिल सकती है. अमेरिका जैसे बड़े और स्थिर बाजार तक आसान पहुंच से भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और एक्सपोर्ट वॉल्यूम में इजाफा होगा. इससे न सिर्फ कंपनियों की आय बढ़ेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

शेयर बाजार के निवेशकों में भी इस डील को लेकर जबरदस्त उत्साह है. लंबे समय से बाजार विदेशी निवेशकों की बिकवाली से दबाव में था. पिछले साल विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय बाजार में भारी बिकवाली की थी और जनवरी महीने में भी यह ट्रेंड जारी रहा. इससे बाजार की धारणा कमजोर हुई और निवेशकों का भरोसा डगमगाया.

हालांकि, अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बाद माहौल बदलता नजर आ रहा है. इस समझौते से भारत की ग्रोथ स्टोरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी और पॉलिसी स्टेबिलिटी का संदेश जाएगा. माना जा रहा है कि विदेशी निवेशक एक बार फिर भारतीय बाजार की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे कैपिटल इनफ्लो बढ़ेगा और बाजार में लिक्विडिटी सुधरेगी.

कुल मिलाकर, यह ट्रेड डील भारत के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकती है. एक्सपोर्ट ग्रोथ, विदेशी निवेश और बाजार की सकारात्मक धारणा—तीनों मिलकर भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की क्षमता रखते हैं. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले महीनों में इसका असर आंकड़ों और बाजार की चाल में कितनी तेजी से दिखता है.

 

 

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