Patna: बिहार में आगामी चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) शुरू किया है. इस प्रक्रिया के तहत बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) हर घर जाकर सर्वे कर रहे हैं और दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं. इस दौरान कई ऐसे लोग सामने आए हैं जो नेपाल, बांग्लादेश या म्यांमार के रहने वाले बताए जा रहे हैं, लेकिन भारतीय वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने की कोशिश कर रहे थे. BLO द्वारा पूछे गए कुछ अहम सवालों के जवाब न दे पाने के कारण ये लोग संदिग्ध श्रेणी में आ गए हैं. सर्वे के दौरान BLO कुछ बुनियादी और जरूरी सवाल पूछ रहे हैं:
जन्मस्थान कहां है?
भारत में कब से रह रहे हैं?
माता-पिता कहां के निवासी थे?
स्कूलिंग कहां से की है?
आधार कार्ड, राशन कार्ड और जन्म प्रमाण-पत्र जैसे दस्तावेज दिखाएं.
ये वही सवाल हैं जिनके जवाब में यदि कोई व्यक्ति उलझता है या दस्तावेज नहीं दे पाता है, तो उसे शक के दायरे में लाया जा रहा है. यदि जन्मस्थान विदेशी हो, शिक्षा भारत से न हुई हो, और माता-पिता की नागरिकता साबित न हो सके, तो BLO उसकी रिपोर्ट जिला निर्वाचन अधिकारी को भेज देता है. अगर किसी की नागरिकता भारतीय न साबित हो पाई, तो उसका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाएगा. इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस को सूचना दी जाएगी. यदि वह अवैध रूप से भारत में रह रहा है, तो उसके खिलाफ फॉरेनर्स एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है, और डिटेंशन की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है.
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगा कि वोटर लिस्ट में बड़ी संख्या में विदेशी घुसे हुए हैं. लेकिन यह पहली बार है जब चुनाव आयोग की सख्त जांच प्रक्रिया के जरिए ऐसे मामले सामने आ रहे हैं. 1 अगस्त 2025 तक जिन लोगों की पहचान स्पष्ट नहीं होगी, उनका नाम 30 सितंबर को प्रकाशित अंतिम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं किया जाएगा. SIR के पूरे आंकड़े सामने आने के बाद ही इस संभावित घुसपैठ की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी.



