Telangana: भाजपा के फायरब्रांड नेता और तेलंगाना के गोशामहल से विधायक टी. राजा सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. अपने तीखे और भड़काऊ बयानों के लिए चर्चित रहे राजा सिंह ने इस्तीफा देते समय भी वही रवैया अपनाया, जिसके लिए वे जाने जाते हैं — कट्टरता, धमकी और हिंदू रक्षक की छवि. अपने पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा, उनकी आवाज दबाई जा रही है. सवाल यह उठता है कि आखिर एक लोकतांत्रिक पार्टी में और कितनी कट्टरता की इजाजत चाहिए?
जो गाय को हाथ लगाएगा, उसे वहीं काट देंगे
राजा सिंह का राजनीतिक सफर विवादों से भरा रहा है. धमकी, घृणा और धार्मिक उन्माद उनके भाषणों की पहचान रही है. हाल ही में उन्होंने कहा था, “जो गाय को हाथ लगाएगा, उसे वहीं काट देंगे” — यह बयान न सिर्फ हिंसा को बढ़ावा देता है, बल्कि संविधान और कानून की भी अवहेलना करता है. पैगंबर मोहम्मद पर आपत्तिजनक टिप्पणी वाले वीडियो के बाद तेलंगाना में भारी विरोध हुआ, जिसके चलते भाजपा ने उन्हें निलंबित किया था.
‘हिंदू राष्ट्र’ की मांग और मुसलमानों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां उनके एजेंडे का हिस्सा रही हैं. ओवैसी बंधुओं को देशद्रोही करार देते हुए उन्होंने कई बार हैदराबाद को “ओवैसी मुक्त” करने की बात कही, जिससे शहर में सांप्रदायिक तनाव बढ़ा. रामनवमी और धार्मिक जुलूसों के दौरान भी उनके बयान दंगे भड़काने वाले माने गए.
भाजपा ने उन्हें चुनावों से पहले फिर से पार्टी में शामिल किया, लेकिन जब हाल ही में रामचंदर राव को तेलंगाना का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, तो खुद को उपेक्षित महसूस कर राजा सिंह ने इस्तीफा दे दिया. टी. राजा सिंह पर 20 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें सांप्रदायिक तनाव और घृणा फैलाने जैसे आरोप शामिल हैं. एक बार तो उन्हें ‘प्रिवेंटिव डिटेंशन एक्ट’ के तहत गिरफ्तार भी किया गया था. निलंबन के समय उन्होंने भाजपा के प्रति निष्ठा जताई थी, लेकिन अब उनके इस्तीफे से सवाल उठ रहा है — क्या यह कट्टरता का अंत है या एक नई शुरुआत?



