Ranchi: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 25 फरवरी 2026 से बिहार के तीन दिवसीय दौरे पर सीमांचल क्षेत्र में हैं। इस दौरान वे खासतौर पर भारत-नेपाल सीमा से सटे जिलों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर रहे हैं। उनका यह दौरा सुरक्षा एजेंसियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकों और जमीनी हालात के आकलन पर केंद्रित है।

किन जिलों पर विशेष ध्यान?

गृह मंत्री का फोकस सीमांचल के प्रमुख जिलों— किशनगंज, पूर्णिया, अररिया, कटिहार, मधेपुरा, सहरसा और सुपौल पर है। ये जिले नेपाल सीमा के नजदीक होने के कारण रणनीतिक रूप से संवेदनशील माने जाते हैं।

मुख्य उद्देश्य

इस दौरे का प्रमुख उद्देश्य भारत-नेपाल की लगभग 700 किलोमीटर लंबी खुली सीमा पर सुरक्षा को और मजबूत करना है। बैठक में निम्न मुद्दों पर विशेष चर्चा हो रही है—

* अवैध घुसपैठ की रोकथाम

* नशीले पदार्थों की तस्करी पर नियंत्रण

* जाली नोट और हथियारों की तस्करी

* सीमावर्ती इलाकों में संभावित डेमोग्राफिक बदलाव की समीक्षा

* सीमा पर तकनीकी निगरानी और इन्फ्रास्ट्रक्चर सुदृढ़ीकरण

किन एजेंसियों के साथ बैठक?

गृह मंत्री सीमा सुरक्षा बलों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समीक्षा कर रहे हैं। इनमें विशेष रूप से एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल), राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी तथा भूमि बंदरगाह प्राधिकरण (LPAI)** के प्रतिनिधि शामिल हैं। सीमा पर मौजूद इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट और निगरानी तंत्र को और प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हो रही है।

क्यों अहम है यह दौरा?

2026 में सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा करने की दिशा में यह दौरा एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। सीमांचल क्षेत्र लंबे समय से संवेदनशील रहा है, इसलिए केंद्र सरकार का यह कदम आने वाले समय में सुरक्षा रणनीति को नया आयाम दे सकता है।

यह दौरा न केवल सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा है, बल्कि सीमा प्रबंधन को आधुनिक और मजबूत बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

 

 

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