Health Alert: कम उम्र में क्यों हो रहे हार्ट अटैक, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

0
290

Health Desk: बिना तेल के भारतीय खाना लगभग अधूरा माना जाता है। हमारी रसोई में सब्जी, दाल, नॉन-वेज, स्नैक्स और तड़के से लेकर डीप फ्राई तक—हर प्रक्रिया में तेल की अहम भूमिका होती है। तेल न सिर्फ स्वाद और खुशबू बढ़ाता है, बल्कि खाने को सही टेक्सचर भी देता है और पकाने की प्रक्रिया को आसान बनाता है। लेकिन जहां तेल जरूरी है, वहीं इसका अधिक और गलत तरीके से इस्तेमाल सेहत के लिए खतरा भी बन सकता है, खासकर दिल की सेहत के लिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, समस्या सिर्फ तेल के प्रकार से नहीं बल्कि उसकी मात्रा और इस्तेमाल के तरीके से भी जुड़ी है। अक्सर लोग तेल को धीमी आंच पर लंबे समय तक गर्म करते रहते हैं या एक ही तेल को बार-बार तलने में इस्तेमाल करते हैं। ऐसा करने से तेल के रासायनिक गुण बदल जाते हैं और उसमें हानिकारक यौगिक बनने लगते हैं। ये ऑक्सीकृत तत्व शरीर में सूजन बढ़ा सकते हैं और दिल की बीमारियों का जोखिम भी बढ़ाते हैं।

धीरे-धीरे अधिक तापमान तक गर्म किया गया तेल स्मोक पॉइंट पार करने के बाद जहरीले धुएं और फ्री रेडिकल्स पैदा कर सकता है। ये तत्व रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को बढ़ाने में भूमिका निभा सकते हैं। यही कारण है कि आजकल कम उम्र में भी हार्ट अटैक और ब्लॉकेज के मामले बढ़ रहे हैं।

दिल की सेहत के लिए यह जरूरी है कि तेल का चुनाव समझदारी से किया जाए और मात्रा पर नियंत्रण रखा जाए। पोषण विशेषज्ञ आमतौर पर सलाह देते हैं कि एक वयस्क व्यक्ति को दिनभर में लगभग 3 से 4 चम्मच से ज्यादा तेल का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही अलग-अलग तरह के तेल—जैसे सरसों, मूंगफली, तिल या राइस ब्रान ऑयल—को बदल-बदल कर इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है।

खाना बनाते समय डीप फ्राई की जगह रोस्टिंग, स्टीमिंग, उबालने या हल्का सा सॉटे करने जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं। तेल को बार-बार गर्म करने से बचें और जले हुए तेल का उपयोग बिल्कुल न करें। सही मात्रा और सही तरीके से तेल का उपयोग कर आप स्वाद भी बनाए रख सकते हैं और दिल को भी सुरक्षित रख सकते हैं।

 

 

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here