भारत ने अमेरिका को दिया स्पष्ट संदेश: टैरिफ जंग के लिए तैयार, नहीं होगा कोई समझौता

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New Delhi: भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ जंग ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है. बुधवार को अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा के तुरंत बाद भारत सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया दी. विदेश मंत्रालय ने इसे “अनुचित, अकारण और तर्कहीन” करार देते हुए साफ कर दिया कि भारत इस मसले पर झुकने के मूड में नहीं है.

सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत इस मुद्दे पर दीर्घकालिक रणनीति के तहत अमेरिका का सामना करेगा, ठीक वैसे ही जैसे वाजपेयी सरकार ने पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद अमेरिकी प्रतिबंधों का डटकर मुकाबला किया था. ट्रंप सरकार ने भले ही अपने टैरिफ आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू नहीं किया है, लेकिन इसे भारत पर दबाव बनाने और मोलभाव की रणनीति के तहत देखा जा रहा है.

अर्थव्यवस्था की मजबूती बनी भारत की ढाल
भारत की अर्थव्यवस्था वर्तमान में काफी स्थिर है और उसका विदेशी मुद्रा भंडार 645 अरब डॉलर से अधिक है. यही वजह है कि भारत न तो चीन की तरह जवाबी टैरिफ लगाएगा और न ही अमेरिका के दबाव में रूस से तेल आयात बंद करेगा. भारत की जीडीपी में व्यापार का हिस्सा केवल 45% है, जो अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे देशों के मुकाबले काफी कम है. इस कारण भारत की निर्भरता वैश्विक व्यापार पर अपेक्षाकृत कम है.

डेयरी और कृषि क्षेत्र में अमेरिका की दाल नहीं गलेगी
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि भारत अपने कृषि और डेयरी क्षेत्र को उसके लिए खोले, लेकिन यह भारत के लिए संभव नहीं है. इन दोनों क्षेत्रों में देश की 40% से ज्यादा आबादी को रोजगार मिला हुआ है. अगर इन्हें विदेशी कंपनियों के लिए खोला गया, तो बेरोजगारी बढ़ेगी और सामाजिक असंतोष गहराएगा. किसान आंदोलन के बाद सरकार इस मोर्चे पर कोई सियासी जोखिम लेने को तैयार नहीं है.

ट्रंप पर भी बढ़ा घरेलू दबाव
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप खुद भी घरेलू स्तर पर दबाव में हैं. उनकी टैरिफ नीतियों को लेकर अमेरिकी उद्योग और राजनयिक जगत में असंतोष बढ़ रहा है. कई अमेरिकी विशेषज्ञ ट्रंप को भारत के साथ रिश्ते खराब न करने की सलाह दे रहे हैं.

भारत के पास हैं विकल्प
भारत ने अब तक कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं और वह भविष्य में भी ऐसे विकल्प तलाशने के लिए तैयार है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी महीने जापान और चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं. यदि अमेरिका के साथ तनाव और बढ़ा, तो भारत अन्य साझेदारों के साथ रणनीतिक गठजोड़ को और मजबूत करेगा. भारत ने अमेरिका को यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी दबाव की राजनीति में नहीं झुकेगा. टैरिफ जंग में भारत दीर्घकालिक रणनीति और आंतरिक मजबूती के साथ मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार है.

 

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