डिंपल यादव पर टिप्पणी से सपा दोहरी उलझन में, भाजपा हमलावर

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Lucknow: मैनपुरी सांसद डिंपल यादव पर आल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी की विवादित टिप्पणी ने समाजवादी पार्टी (सपा) को गहरी राजनीतिक उलझन में डाल दिया है. एक ओर मुस्लिम वोट बैंक को नाराज़ न करने की मजबूरी है, तो दूसरी ओर महिला सम्मान के मुद्दे पर पार्टी की चुप्पी भाजपा को हमलावर होने का मौका दे रही है.

मौलाना की टिप्पणी सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव के पहनावे को लेकर थी, जब वे हाल ही में दिल्ली में संसद के पास स्थित एक मस्जिद गई थीं. इसके बाद से लखनऊ से दिल्ली तक राजनीतिक पारा चढ़ गया है. भाजपा ने इस मामले को महिला सम्मान से जोड़कर बड़ा मुद्दा बना लिया है. संसद भवन के बाहर भाजपा सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया, वहीं महिला कल्याण मंत्री बेबीरानी मौर्य ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव की चुप्पी पर सवाल खड़े किए. भाजपा लगातार सवाल उठा रही है कि क्या अखिलेश यादव सत्ता की राजनीति में पत्नी के अपमान को स्वीकार कर रहे हैं? क्या सपा में महिलाओं की गरिमा अब मौलवियों के निर्देश पर तय होगी?

इस मुद्दे पर सपा की रणनीति ‘वेट एंड वॉच’ की रही है. शुरुआत में पार्टी ने पूरी तरह चुप्पी साधे रखी, पर भाजपा के तीखे तेवरों के बाद अब फ्रंटल संगठनों को सामने लाया गया है. विरोध दर्ज कराने के लिए मुकदमा भी कराया गया है, ताकि मुस्लिम वोट बैंक को नाराज़ किए बिना विरोध का संदेश जाए. पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण साधने की कोशिश कर रही सपा फिलहाल दोहरी चुनौती से जूझ रही है — एक ओर महिला सम्मान का मुद्दा, दूसरी ओर अल्पसंख्यक वर्ग की नाराज़गी का डर.

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