Lucknow: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में रहने वाले छांगुर बाबा उर्फ जलालुद्दीन की आलीशान कोठी से देशविरोधी गतिविधियों का सनसनीखेज खुलासा हुआ है. साधारण झींगुर सा दिखने वाला यह शख्स अब आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) के रडार पर है. छांगुर बाबा पर धर्मांतरण के साथ-साथ गजवा-ए-हिंद की साजिश रचने के आरोप लगे हैं. बताया जा रहा है कि वह इस्लामिक देशों से विदेशी फंडिंग के जरिए एक बड़े नेटवर्क को संचालित कर रहा था.
छांगुर बाबा ने अपनी कोठी को धर्मांतरण का अड्डा बना रखा था, जहां वह युवाओं को पहले इस्लाम स्वीकार करने के लिए कलमा पढ़वाता, फिर प्रतिबंधित पशु का मांस खिलाकर उनकी आस्था की जांच करता. वह इन घटनाओं के वीडियो बनाकर उन्हें इस्लामिक देशों की उन संस्थाओं को भेजता था जो धर्मांतरण के लिए आर्थिक मदद देती हैं. ATS को जांच में ऐसे विदेशी फंडिंग के सुराग भी मिले हैं.
खास बात यह है कि छांगुर का नेटवर्क नेपाल सीमा से सटे 46 गांवों में फैला हुआ था, जहां वह जलसों के जरिए युवाओं को अपने प्रभाव में लेता और कट्टरता की ओर झुकाव रखने वालों की आर्थिक मदद की योजना बनाता. एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क को मजबूत करने के लिए करीब 10 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग की योजना बनाई गई थी.
छांगुर बाबा की पृष्ठभूमि चौंकाने वाली है. 2015 में वह एक पुरानी बाइक से अंगूठी और नग बेचने का काम करता था. मगर 2019-20 में कोरोना काल के दौरान उसकी आर्थिक स्थिति में अचानक उछाल आया और 2022 तक वह लग्जरी गाड़ियों में घूमने लगा. बीते चार वर्षों में उसकी संपत्ति में बेतहाशा इजाफा हुआ है, जिसे लेकर ATS गंभीर जांच कर रही है.
गजवा-ए-हिंद एक खतरनाक विचारधारा है, जिसका मकसद भारत में इस्लामिक शासन की स्थापना करना है. इसमें जंग के माध्यम से काफिरों को हराकर उन्हें मुसलमान बनाने का लक्ष्य बताया जाता है. छांगुर बाबा इसी विचारधारा को बल देने के प्रयास में था, जिसकी परतें अब खुलने लगी हैं. ATS की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.



