SBU में टॉक सीरीज, ISRO के रिसर्च की दी गई जानकारी

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Ranchi: सरला बिरला विश्वविद्यालय (SBU) में सुपर सैटरडे फैकल्टी एंपावरमेंट टॉक सीरीज (भाग-2) के अंतर्गत आज नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर, इसरो के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान का व्याख्यान हुआ। ‘सैटेलाइट्स फॉर सोसाइटी: इंडियन पर्सपेक्टिव’ विषय पर बोलते हुए उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास और इसमें हो रहे नवीनतम प्रयोगों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने भारत के छोटे-छोटे कदमों से शुरुआत से लेकर अब अंतरिक्ष में सशक्त मौजूदगी की चर्चा की।

इसरो के प्रमुख क्षेत्रों, अंतरिक्ष तकनीक के उपयोग, मानव अंतरिक्ष मिशन, सैटेलाइट और लॉन्चिंग सिस्टम तथा वैज्ञानिकों और युवाओं को ट्रेनिंग देने पर भी उन्होंने उपस्थित श्रोताओं को बताया। साथ ही भारत के रॉकेट और मिशनों, विभिन्न देशों के उपग्रहों, उनसे मिले डेटा का उपयोग तथा भविष्य की योजना के विषय में जानकारी दी।

कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र भी हुआ, जिसमें छात्रों और शिक्षकों ने डॉ. चौहान से सवाल पूछे। माननीय कुलपति प्रो सी जगनाथन ने सत्र के विषय में बोलते हुए इसे छात्रों के लिए उपयोगी करार दिया। उन्होंने बताया कि इसरो की मदद से अब तक छात्र 300 से ज़्यादा स्टार्टअप शुरू कर चुके हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आरोही आनंद ने किया। इस अवसर पर विवि के शिक्षकगण और शिक्षकेत्तर कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

एसबीयू के प्रतिकुलाधिपति बिजय कुमार दलान, माननीय महानिदेशक प्रो गोपाल पाठक और राज्यसभा सांसद डॉ प्रदीप कुमार वर्मा ने इस कार्यक्रम के आयोजन पर अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की है।

महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े हैं डॉ. चौहान

डॉ. प्रकाश चौहान ने आईआईटी रूड़की से एप्लाइड जियोफिजिक्स में स्नातकोत्तर और गुजरात विश्वविद्यालय से भौतिकी में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने 1991 में इसरो में वैज्ञानिक के रूप में कार्य शुरू किया और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विविध अनुप्रयोगों, जैसे कि भूविज्ञान, महासागर, वायुमंडलीय अध्ययन और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में योगदान दिया। वे चंद्रयान-1 और 2 जैसे ग्रह मिशनों से जुड़े रहे हैं और चंद्रमा की सतह पर जल अणुओं की खोज में निर्णायक भूमिका निभाई।

वर्तमान में वे संयुक्त राष्ट्र की अंतरिक्ष उपयोग समिति के कार्य समूह के अध्यक्ष हैं और पहले NASA-ISRO ग्रह विज्ञान समूह और CEOS कार्य समूह में भी योगदान दे चुके हैं। उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिनमें 2023 का एशिया पैसिफिक क्षेत्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार भी शामिल है। उन्होंने 150 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं और वे कई वैज्ञानिक संस्थाओं के फेलो हैं।

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