Ranchi: सीएम Hemant Soren ने सोमवार को वित्त विभाग और वाणिज्य कर विभाग की समीक्षा बैठक की। बैठक में विभागीय मंत्री Radha Krishna Kishore भी मौजूद रहे। समीक्षा बैठक के बाद मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मुख्यमंत्री की सोच है कि झारखंड का वित्तीय प्रबंधन इतना मजबूत बनाया जाए कि राज्य को केंद्र सरकार पर निर्भर नहीं रहना पड़े।
उन्होंने कहा कि राज्य को केंद्र से मिलने वाली लगभग 5000 करोड़ रुपये की राशि अब तक नहीं मिली है। वहीं जीएसटी व्यवस्था के कारण झारखंड को हर वर्ष करीब 4000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है। मंत्री ने आरोप लगाया कि मनरेगा योजना का नाम बदलकर नई योजना लागू की गई है, जिससे राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ेगा। पहले मनरेगा में 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 10 प्रतिशत राज्य सरकार देती थी, लेकिन नई व्यवस्था में 60-40 का अनुपात कर दिया गया है। इससे झारखंड को अब 40 प्रतिशत राशि वहन करनी पड़ेगी।
उन्होंने बताया कि समीक्षा में यह आकलन किया गया है कि राज्य में सक्रिय मजदूरों की संख्या के आधार पर झारखंड पर लगभग 6000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। साथ ही जल जीवन मिशन योजना को लेकर भी केंद्र सरकार पर सहयोग नहीं देने का आरोप लगाया गया।
वाणिज्य कर विभाग देता है 25 हजार करोड़ का राजस्व
मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि वाणिज्य कर विभाग राज्य को करीब 25 हजार करोड़ रुपये का राजस्व देता है, जिससे विकास और स्थापना मद में खर्च किया जाता है। बावजूद इसके विभाग में 175 पद खाली पड़े हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के कारण राजस्व संग्रह प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि कई अधिकारियों के पास वाहन तक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे फील्ड कार्य में परेशानी हो रही है। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में सचिव को प्रस्ताव देने का निर्देश दिया है और कहा है कि इसी वित्तीय वर्ष में अधिकारियों को वाहन उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
सीएसआर खर्च पर भी उठा सवाल
बैठक में सीएसआर फंड के उपयोग को लेकर भी चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का सीएसआर राशि पर सीधा नियंत्रण नहीं है। उन्होंने बताया कि राज्य में मौजूद बड़ी कंपनियों जैसे Steel Authority of India Limited और Tata Group समेत अन्य कॉर्पोरेट समूहों ने पिछले तीन वर्षों में सीएसआर के तहत खर्च की गई राशि का अधिकांश हिस्सा केवल 12 जिलों में खर्च किया है। उन्होंने कहा कि कंपनियों के शुद्ध लाभ की स्पष्ट जानकारी भी उपलब्ध नहीं हो सकी है।
ट्रेजरी नहीं, वेतन घोटाला : मंत्री
ट्रेजरी घोटाले के सवाल पर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि यह ट्रेजरी घोटाला नहीं बल्कि वेतन घोटाला है। उन्होंने कहा कि ट्रेजरी ने भुगतान डीडीओ की स्वीकृति के आधार पर किया था। यह मामला विशेष रूप से पुलिस विभाग और Animal Husbandry Department, रांची में सामने आया है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। मंत्री ने कहा कि इस मामले में डीडीओ की जिम्मेदारी तय करते हुए उन्हें तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए।


