Patna: बिहार चुनाव से पहले तेज प्रताप यादव के राजनीतिक जीवन में उथल-पुथल चरम पर है. पार्टी और परिवार से दूरी बनाए जाने के बाद भी वे अभी भी राजद के प्रति समर्पित हैं और पार्टी से बाहर जाने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने कहा कि वे राजद में ही रहेंगे और पार्टी के लिए प्रचार भी करेंगे.
तेज प्रताप यादव ने बताया कि इस समय उनके सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ पार्टी के भीतर के विरोधी हैं और दूसरी तरफ बाहर के. उन्होंने यह भी स्वीकारा कि उनके राजनीतिक सफर में उनकी मां राबड़ी देवी को चिंता होना स्वाभाविक है, लेकिन वे हर विवाद का जवाब अपने काम से देंगे. उनके मुताबिक, दुश्मन चाहे घर के अंदर हो या बाहर, उसे पहचान पाना आसान नहीं होता. आज हर कदम पर चुनौतियां मौजूद हैं.
तेज प्रताप ने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव के साथ रिश्तों को लेकर भी बड़ी बात कही. उन्होंने साफ किया कि वे अपने माता-पिता को भगवान मानते हैं और हमेशा उनका आशीर्वाद लेते हैं. तेजस्वी से संबंधों को लेकर उन्होंने कहा कि वे रिश्ते बिगाड़ने में विश्वास नहीं रखते और मौजूदा हालात में उन्हें और भी मजबूत बनाए रखने की जरूरत है. उनके मुताबिक, फिलहाल परिवार और पार्टी के भीतर जो उठा-पटक चल रही है, उसमें भावनाओं को संभालना जरूरी है.
इस दौरान जब उनसे यह सवाल किया गया कि क्या वे नई पार्टी बनाएंगे या किसी दूसरी पार्टी में शामिल होंगे, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे न तो कोई नई पार्टी बना रहे हैं और न ही राजद छोड़ने वाले हैं. उनका लक्ष्य तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनते देखना है और वे खुद ‘किंग मेकर’ की भूमिका निभाना चाहते हैं.
तेज प्रताप ने अंत में यह भी जोड़ा कि उनका राजनीतिक अंदाज उनके पिता लालू प्रसाद यादव से मेल खाता है. वे खुद को जमीन से जुड़ा नेता मानते हैं और मानते हैं कि गांव और आम जनता में उनकी यही छवि पसंद की जाती है, भले ही कुछ लोगों को यही बात खटकती हो.



