अवैध धर्मांतरण रैकेट: आगरा से कोलकाता तक फैला था जाल, विदेशों से होती थी फंडिंग

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Lucknow: उत्तर प्रदेश पुलिस और एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में एक बड़े अवैध धर्मांतरण गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जिसके तार न केवल देश के विभिन्न राज्यों बल्कि कनाडा, लंदन और अमेरिका तक फैले हुए हैं. इस रैकेट में शामिल लोगों की सूची में सरकारी कर्मचारी से लेकर यूट्यूबर और विदेशों से फंडिंग जुटाने वाले तक शामिल हैं. गिरोह खासकर युवतियों को निशाना बनाकर, उन्हें बहला-फुसलाकर धर्मांतरण के लिए मजबूर करता था.

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरोह में हर सदस्य की एक तय भूमिका थी — कोई लड़कियों को जाल में फंसाता, कोई निकाह के लिए लड़कों का इंतजाम करता, कोई उनके दिमाग का ब्रेनवॉश करता, तो कोई दस्तावेजों के जरिये कानूनी सुरक्षा की आड़ देता. गिरोह पहले युवतियों को प्रेमजाल में फंसाता, फिर उन्हें घर, पैसा और भावनात्मक सहारा देकर पूरी तरह से अलग-थलग कर देता था. इस बीच विदेशों से फंडिंग जुटाकर उनके लिए रहने-सहने की व्यवस्था की जाती. किसी भी युवती के वापस लौटने की संभावना खत्म करने के लिए उन्हें ब्रेनवॉश किया जाता था.

इस काम में गोवा निवासी आयशा उर्फ एसबी कृष्णा, जो मूल रूप से ओडिशा की है और एक सेवानिवृत्त फौजी की बेटी है, अहम भूमिका निभा रही थी. आयशा गिरोह के लिए विदेशों से फंडिंग लाती और पैसे को अलग-अलग सदस्यों में बांटती थी. उसका कथित पति अली हसन उर्फ शेखर राय कोलकाता की कोर्ट में कार्यरत है और प्रभावशाली लोगों से संपर्क कराकर गिरोह की मदद करता था. कोलकाता निवासी रीत बनिक उर्फ इब्राहिम इस गिरोह का प्रमुख संचालक था. वह इंस्टाग्राम पर ‘Connecting Revert’ नाम की आईडी चला रहा था, जिसके जरिये युवाओं को “इस्लाम में लौटने” के लिए प्रेरित करता था. वह सोशल मीडिया पर सक्रिय रहकर युवतियों को संपर्क में लाता और उन्हें कोलकाता बुलाता था. उसका एजेंट ओसामा धर्मांतरण करवाने आए लोगों को कोलकाता की मुस्लिम बस्तियों में रुकवाता था.

दिल्ली निवासी मुस्तफा उर्फ मनोज, जयपुर के जुनैद कुरैशी और मोहम्मद अली, मुजफ्फरनगर के अब्बू तालिब, देहरादून के अब्दुल रहमान जैसे लोग अलग-अलग राज्यों में सक्रिय थे. इनका काम युवतियों को फुसलाना, उनका धर्मांतरण कराना और फिर कानूनी दस्तावेज तैयार कराकर उन्हें गिरोह की गिरफ्त में बनाए रखना था.

आगरा निवासी रहमान कुरैशी ‘सुन्ना’ नाम से यूट्यूब चैनल चलाता था, जिसके एक लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. वह धर्मांतरण कर चुकी युवतियों के वीडियो दिखाकर बाकी युवतियों को प्रभावित करता था. इसी तरह, जयपुर निवासी मोहम्मद अली, जो पहले से कनवर्टेड है, पहले कलीम सिद्दीकी के लिए काम करता था और अब राजस्थान में गिरोह की गतिविधियों का संचालन कर रहा था. पुलिस आयुक्त दीपक कुमार के अनुसार, आगरा के सदर थाना क्षेत्र की दो पंजाबी बहनों की तलाश में 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को सात अलग-अलग टीमों में लगाया गया था. बहनों के सोशल मीडिया अकाउंट बंद थे, फोन बंद था. साइबर सेल को इंस्टाग्राम की ‘Connecting Revert’ आईडी से सुराग मिला, जिसके आधार पर कोलकाता जाकर दोनों बहनों को बरामद किया गया.

पुलिस ने कोलकाता से शेखर राय और रीत बनिक को, देहरादून से अब्दुल रहमान को और अन्य राज्यों से सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है. सभी से पूछताछ की जा रही है, और पूछताछ की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जा रही है. प्रारंभिक जांच में गिरोह के तार पीएफआई, एसडीपीआई और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से जुड़े होने की संभावना जताई गई है. पुलिस को कई बैंक खातों की जानकारी मिली है, जिसमें विदेशी फंडिंग का लेन-देन हुआ है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मिशन अस्मिता के तहत यह कार्रवाई की गई है. पुलिस ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और गिरोह के हर सदस्य को कानून के शिकंजे में लाया जाएगा. एटीएस और एसटीएफ की टीमों ने जांच और तेज कर दी है. फंडिंग कहां से आई, कौन-कौन लड़कियां फंसाई गईं, और निकाह के लिए किन लड़कों का इस्तेमाल हुआ — इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं. अभी और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. पुलिस ने सभी नागरिकों से अपील की है कि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें ताकि इस तरह की राष्ट्रविरोधी साजिशों को समय रहते रोका जा सके.

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