New Delhi: देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंपते हुए तत्काल प्रभाव से पद छोड़ने की घोषणा की. उन्होंने अपने पत्र में कहा कि वह स्वास्थ्य कारणों और चिकित्सीय सलाह के मद्देनजर यह कदम उठा रहे हैं. धनखड़ ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति का पदभार संभाला था और उनका कार्यकाल 2027 तक था. वह राज्यसभा के सभापति भी थे.
धनखड़ हाल ही में दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में एंजियोप्लास्टी से गुजरे थे. इस्तीफे में उन्होंने लिखा, “स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने हेतु, मैं संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देता हूं.”
उन्होंने राष्ट्रपति के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए लिखा, “उनका समर्थन अडिग रहा. उनके साथ कार्य करना मेरे लिए सौभाग्य की बात रही.” प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के प्रति आभार प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि इस कार्यकाल में उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला.
धनखड़ ने संसद सदस्यों से मिले स्नेह और समर्थन को याद करते हुए कहा, “सभी सांसदों का सहयोग, विश्वास और गर्मजोशी मेरी स्मृति में हमेशा बनी रहेगी.” उन्होंने भारत के हालिया आर्थिक और वैश्विक प्रगति को लेकर गर्व जताया और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य में विश्वास व्यक्त किया.
हालांकि उनके इस्तीफे ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है. कांग्रेस पार्टी ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा, “धनखड़ का इस्तीफा समझ से परे है, उन्हें इस पर पुनर्विचार करना चाहिए. उम्मीद है प्रधानमंत्री उन्हें मनाएंगे.”
कांग्रेस सांसद नीरज डांगी ने इसे “चौंकाने वाला” बताया और कहा, “स्वास्थ्य कारणों के पीछे राजनीतिक दबाव भी हो सकता है. ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने यह निर्णय उन पर थोपा हो. यह देश के लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है.” यह भारत के संवैधानिक इतिहास में पहली बार है जब किसी उपराष्ट्रपति ने स्वयं इस्तीफा दिया है.



