Ranchi: झारखंड ब्राह्मण महासभा के संयोजक मनोज कुमार पाण्डेय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के प्रस्तावित नियमों को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में भी जाति के आधार पर समाज को बांटने का प्रयास कर रही है। इससे देश के वे सामान्य छात्र-छात्राएं, जो अपने उज्ज्वल भविष्य का सपना देख रहे हैं, सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
मनोज कुमार पाण्डेय ने कहा कि यदि यूजीसी 2026 से जुड़े नियम लागू होते हैं तो विद्यार्थी पढ़ाई पर कम और आपसी मतभेदों में अधिक उलझे रहेंगे, जिससे सामाजिक सौहार्द और भाईचारा कमजोर होगा। उन्होंने इसे “काला कानून” बताते हुए कहा कि इससे पूरे देश में आपसी विद्वेष फैलाने की साजिश रची जा रही है। ब्राह्मण समाज इस कानून का न केवल झारखंड में बल्कि पूरे देश में पुरजोर विरोध करता है और आगामी भारत बंद का समर्थन करता है।
महिला प्रकोष्ठ की संयोजिका ललिता ओझा ने कहा कि प्रदेश की सभी ब्राह्मण महिलाएं प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस कानून को वापस लेने की मांग करेंगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा को राजनीति और जातिवाद से मुक्त रखा जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी सकारात्मक वातावरण में आगे बढ़ सके।
इस विरोध में विपिन पाण्डेय, अशोक कुमार पाण्डेय, अनुप पाण्डेय, सुमित मिश्रा, रेणु पाण्डेय, विना पाण्डेय, अलका पाण्डेय, सतरूपा पाण्डेय और राम प्रकाश तिवारी सहित कई समाज के लोग शामिल रहे। वक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि न्यायपालिका इस मुद्दे पर निष्पक्ष निर्णय देगी।
ब्राह्मण महासभा ने सरकार से मांग की है कि शिक्षा नीति में किसी भी प्रकार का भेदभाव समाप्त किया जाए और छात्रों को समान अवसर प्रदान किए जाएं, ताकि देश का भविष्य सुरक्षित और मजबूत बन सके।



