Lucknow: पंजाब यूनिवर्सिटी में एमएससी डाटा साइंस की पढ़ाई कर रही गोवा निवासी एसबी कृष्णा उर्फ आयशा अब अवैध धर्मांतरण गिरोह की अहम कड़ी बन गई है. हाल ही में आगरा पुलिस द्वारा गिरोह का भंडाफोड़ किए जाने पर जो खुलासे हुए हैं, वे चौंकाने वाले हैं. पुलिस जांच में सामने आया है कि आयशा को यूनिवर्सिटी के दौरान कश्मीरी छात्राओं ने ब्रेनवॉश कर इस्लाम की ओर प्रेरित किया. यहीं से उसके कट्टरपंथी नेटवर्क से जुड़ने की शुरुआत हुई.
आयशा को कश्मीरी छात्राएं कश्मीर तक ले गईं, जहां उसे कई दिनों तक साथ रखा गया. बाद में जब वह दिल्ली लौटी, तो परिवार ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई और एक युवक मुस्तफा को जेल जाना पड़ा. कुछ समय बाद आयशा फिर से संपर्क में आ गई और कोलकाता जाकर धर्म परिवर्तन कर लिया.
इसके बाद वह अब्दुल रहमान के माध्यम से इस्लामी कट्टरपंथी गिरोह को आर्थिक मदद पहुंचाने लगी. पुलिस के अनुसार, व्हाट्सएप पर आयशा के कई ग्रुप थे, जिनके जरिए वह अन्य लोगों से जुड़ी रहती थी और उन्हें धर्मांतरण के लिए प्रेरित करती थी. पुलिस पूछताछ में आयशा से कई और अहम जानकारियां मिली हैं, जिनकी जांच की जा रही है.
इस गिरोह में जयपुर का पियूष पंवार उर्फ मोहम्मद अली भी शामिल है, जिसने टोंक की एक युवती के प्रेम में पड़कर इस्लाम कबूल किया. बाद में वह कलीम सिद्दीकी के संपर्क में आया और पीएफआई से जुड़ गया. कोलकाता में दीनी तालीम लेते समय उसकी मुलाकात आयशा से हुई, जो उसे फंडिंग उपलब्ध कराती थी. मोहम्मद अली अब पुलिस को घर वापसी की इच्छा जाहिर कर चुका है. गिरोह का एक और सदस्य रीथ बनिक उर्फ मोहम्मद इब्राहिम, आगरा की दो सगी बहनों को कोलकाता ले जाने में शामिल था. वह उन्हें इंस्टाग्राम पर वीडियो भेजता था और डाक से साहित्य भी उपलब्ध कराता था.
गिरफ्तार मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान को आगरा पुलिस ने दिल्ली के मुस्तफाबाद से पकड़ा है. वह गोवा की आयशा को फंड भेजता था और कलीम सिद्दीकी के गिरोह को सक्रिय रूप से संचालित करता था. तलाशी के दौरान पुलिस को उसके घर से रोहतक की एक लापता युवती भी मिली, जिसे धर्मांतरण के लिए लाए जाने की आशंका है. साथ ही, इस्लामी और बहुजन समाज से जुड़ा बड़ा धार्मिक साहित्य, पुस्तिकाएं, और धर्मांतरण के लिए प्रेरित करने वाली सामग्री भी बरामद हुई है. अब्दुल रहमान का असली नाम महेंद्र पाल था. 1990 में उसने ईसाई धर्म अपनाया और फिर मुस्लिम धर्म. अब वह ‘चचा’ के नाम से जाना जाता है और दिल्ली में आलीशान घर में रहता है. वह कनाडा निवासी दाऊद अहमद के संपर्क में था और ग्लोबल पीस सेंटर जैसे संगठनों से जुड़ा था.
ध्यान देने वाली बात यह है कि इस गिरोह के प्रमुख, कलीम सिद्दीकी को यूपी एटीएस ने 2021 में गिरफ्तार किया था और उसे सामूहिक धर्मांतरण के मामले में आजीवन कारावास की सजा दी गई थी. अब इस नेटवर्क की परतें खुलने से अवैध धर्मांतरण के पीछे चल रहे एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय फंडिंग और कट्टरपंथी एजेंडे का खुलासा हो रहा है. पुलिस इस पूरे मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह की जड़ें तलाशने में जुटी है. साथ ही, आतंकी फंडिंग की आशंका को लेकर भी गंभीरता से जांच की जा रही है.


