New Delhi: बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और उसके फ्रंट संगठन ‘द मजीद ब्रिगेड’ (टीएमबी) को अमेरिका द्वारा विदेशी आतंकी संगठन घोषित किए जाने की कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा कि यह फैसला बलूच लोगों के संघर्ष को आतंकवाद बताकर उन्हें बदनाम करने की साजिश है.

मीर ने कहा कि बलूच आतंकवादी नहीं हैं, बल्कि वे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के शिकार हैं. अमेरिका की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि वह पाकिस्तान के कट्टरपंथी एजेंडे को नजरअंदाज कर रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका दोहरा रवैया अपना रहा है—जो पाकिस्तान जैसे देश को सहयोगी कहता है, जबकि वही देश ओसामा बिन लादेन को शरण देता है और पश्चिमी हितों के खिलाफ जेहाद छेड़ता है.

बलूच कार्यकर्ता ने बलूचिस्तान की दशकों से चली आ रही पीड़ा का जिक्र करते हुए कहा कि यहां के लोगों ने 78 वर्षों से राज्य प्रायोजित आतंक, आर्थिक लूट, परमाणु परीक्षणों से उत्पन्न रेडियोधर्मी संकट और धार्मिक कट्टरता का सामना किया है. उन्होंने कहा कि आईएस-खुरासान जैसे आतंकी संगठन, जो पाकिस्तानी आईएसआई के प्रॉक्सी हैं, बलूच नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहे हैं.

मीर यार बलूच ने कहा कि 9/11 के बाद भी बलूच जनता ने अमेरिका का साथ दिया और कभी उसके खिलाफ हथियार नहीं उठाया. नाटो की आपूर्ति लाइनें बलूचिस्तान से होकर गुजरती रहीं, लेकिन बलूच स्वतंत्रता सेनानियों ने कभी अमेरिकी सैनिकों पर हमला नहीं किया. इसके विपरीत, पाकिस्तान की सेना और आईएसआई ने अमेरिका विरोधी रैलियां आयोजित कीं और आतंकवादियों को संरक्षण दिया.

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