Jhar Media : छिंदवाड़ा के 9 बच्चों को पहले बुखार आया. डॉक्टर ने कुछ को कोल्ड्रिफ सिरप तो कुछ को नेक्सा डीएस दवाई दी. इसके बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी. किडनी फेल हो गई. एक-एक करके 9 बच्चों ने दम तोड़ दिया. ऐसे 1420 बच्चे हैं, जो सर्दी, बुखार और जुकाम से प्रभावित रहे हैं.
बहरहाल, सरकार ने कफ सिरप के पूरे बैच पर रोक लगा दी है. दिल्ली में CDSCO, पुणे में वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट और एमपी सरकार ने 9 सैंपलों की जांच करवाई है. किसी सैंपल में कुछ संदिग्ध नहीं मिलने का दावा किया गया है. राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) भी मामले की जांच कर रहा है.
मौत का पहला संदिग्ध मामला 24 अगस्त को सामने आया था और पहली मौत 7 सितंबर को हुई थी. अब तक 9 बच्चे छिंदवाड़ा में जान गंवा चुके हैं, लेकिन किसी बच्चे का पोस्टमॉर्टम नहीं हुआ है. पोस्टमॉर्टम दो तरह से होता है- मेडिकोलीगल और पैथोलॉजिकल.
प्रशासन का कहना है कि कोई पुलिस केस दर्ज नहीं हुआ. लेकिन ये एक तथ्य है कि 9 बच्चे अब तक जान गंवा चुके हैं. सवाल ये है कि इन मौतों की जिम्मेदारी किसकी है.



