New Delhi; देशभर के थर्मल पावर प्लांटों में कोयले की कमी एक बार फिर चिंता का कारण बन गई है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) और कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 148 प्रमुख कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में औसतन करीब 7 दिनों का कोयला स्टॉक ही बचा है। इनमें 45 बिजली संयंत्र ऐसे हैं, जहां कोयले का भंडार घटकर महज 1 से 4 दिनों का रह गया है।
सप्लाई नहीं बढ़ी तो बढ़ सकती है बिजली संकट की आशंका
कोयले के स्टॉक में लगातार कमी के बीच यदि समय रहते आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो कई राज्यों में बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसका असर घरेलू बिजली आपूर्ति के साथ-साथ उद्योगों और आम जनजीवन पर भी पड़ने की आशंका है।
स्थिति को गंभीर होने से रोकने के लिए कोल इंडिया ने अपनी अनुषंगी कंपनियों को कोयला आपूर्ति बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। खास तौर पर झारखंड में स्थित सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL), भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) और ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) को प्रभावित राज्यों के बिजली संयंत्रों तक कोयले की आपूर्ति तत्काल बढ़ाने को कहा गया है।
कोयला आपूर्ति में तेजी लाकर बिजली संयंत्रों के स्टॉक को सुरक्षित स्तर तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में कोयले की उपलब्धता और सप्लाई की स्थिति यह तय करेगी कि बिजली उत्पादन पर इसका कितना असर पड़ता है।


