Ranchi: झारखंड सरकार ने छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शन और CID की प्रारंभिक जांच के बाद 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द, 6 को स्थगित और वर्ष 2014 से अब तक हुई 17 परीक्षाओं की जांच का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कैबिनेट द्वारा लिए गए इस फैसले ने राज्य में एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा कर दी है, जहां एक तरफ न्याय की मांग कर रहे युवा जश्न मना रहे हैं, तो दूसरी तरफ वैध रूप से नियुक्त हो चुके कर्मी अचानक सड़क पर आ गए हैं।
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सरकार का फैसला और कार्रवाई, व्यापक स्तर पर रद्दीकरण
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC-CGL) और आउटसोर्सिंग एजेंसी TDPL द्वारा 2014 से आयोजित की गई परीक्षाओं को अनियमितताओं के चलते रद्द कर दिया गया है।
प्रभावित पद: रद्द परीक्षाओं में डिप्टी कलेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, ड्रग इंस्पेक्टर, सिविल जज और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर जैसे बड़े प्रशासनिक और तकनीकी पद शामिल हैं।
इन गड़बड़ियों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का अनुरोध किया है। साथ ही, JPSC-JSSC में आंतरिक सतर्कता सेल गठित करने और आईएएस अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में सुधार समिति बनाने की घोषणा की है।
कर्मियों का तर्क: उनका कहना है कि उन्होंने झारखंड उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद पूरी तरह वैध तरीके से नियुक्ति पाई थी। वे जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन दोषियों को सजा देने के बजाय पूरी परीक्षा रद्द कर सभी को एकतरफा हटाना पूरी तरह अनुचित है। प्रभावित कर्मियों ने इस फैसले के खिलाफ न्यायालय (Court) का रुख करने की चेतावनी दी है।
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इस प्रकार, सरकार का यह कदम जहां परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने की एक कोशिश है, वहीं इसने राज्य में रोजगार और प्रशासनिक स्थिरता के सामने एक नया कानूनी और सामाजिक संकट खड़ा कर दिया है।


