Report- Prem Sinha
भारत जैसे बड़े चीनी उत्पादक देश का आयातक बनने की स्थिति में आना वैश्विक चीनी बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम है. आने वाले महीनों में घरेलू उत्पादन, आयात और मांग का संतुलन यह तय करेगा कि चीनी की कीमतों पर दबाव कितना कम होता है.
New Delhi: देश में त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों और खाद्य उद्योग की चिंता बढ़ा दी है. कभी दुनिया के प्रमुख चीनी निर्यातक देशों में शामिल भारत अब घरेलू मांग को पूरा करने के लिए चीनी के आयात की तैयारी कर रहा है. सरकार का कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी केवल इथेनॉल उत्पादन के कारण नहीं हुई है, बल्कि इसके पीछे कई अन्य कारकों का भी योगदान है.
सरकार के मुताबिक, मौजूदा समय में चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे घरेलू उत्पादन का अनुमान से कम रहना, त्योहारी मौसम से पहले मांग में बढ़ोतरी, मौसम संबंधी कारणों से गन्ने की फसल को नुकसान, वैश्विक स्तर पर चीनी की आपूर्ति में कमी तथा कुछ वर्गों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी जैसे कारण शामिल हैं.
उत्पादन अनुमान से 37 LMT कम
मौजूदा सीजन में देश में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने का अनुमान है. यह गन्ना उत्पादक राज्यों के शुरुआती अनुमान 343 LMT से लगभग 37 LMT कम है.
गन्ने की फसल को रेड रॉट (लाल सड़न) और टॉप बोरर जैसे रोगों से नुकसान पहुंचा है. इसके अलावा मौसम से जुड़ी प्रतिकूल परिस्थितियों ने भी उत्पादन पर असर डाला है.
क्या इथेनॉल है चीनी की महंगाई की वजह?
चीनी की कीमतों में तेजी के बीच इथेनॉल उत्पादन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. हालांकि सरकार का कहना है कि मौजूदा कीमत वृद्धि को केवल इथेनॉल उत्पादन से जोड़ना सही नहीं है. सरकार के अनुसार, बाजार में कीमतों पर असर डालने वाले कई कारक एक साथ सक्रिय हैं.
सरकार का दावा- देश में पर्याप्त स्टॉक
उत्पादन अनुमान कम होने के बावजूद सरकार का कहना है कि देश में चीनी का पर्याप्त भंडार मौजूद है. उपलब्ध स्टॉक इतना है कि अक्टूबर में नए पेराई सीजन के शुरू होने तक घरेलू मांग पूरी की जा सकती है.
हालांकि, त्योहारों से पहले मांग बढ़ने और उत्पादन में कमी के कारण बाजार में कीमतों पर दबाव बना हुआ है. ऐसे में सरकार का चीनी आयात का फैसला घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
त्योहारों से पहले बढ़ी चिंता
दशहरा, दिवाली और अन्य त्योहारों के दौरान मिठाइयों, बेकरी उत्पादों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की खपत बढ़ जाती है. ऐसे में कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सीधा असर उपभोक्ताओं के साथ-साथ मिठाई और खाद्य उद्योग पर भी पड़ सकता है.


