Ramgarh : संघर्ष और हौसले की कहानी कभी-कभी ऐसी तस्वीरों में सामने आती है, जो सीधे दिल को छू जाती हैं. रामगढ़ के दुलमी की रहने वाली कविता देवी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. पति की मौत के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. गुजरात में मजदूरी करने वाले पति के निधन के बाद कविता ईंट भट्ठे में मजदूरी कर अपने दो बच्चों और सास-ससुर का भरण-पोषण कर रही हैं.
कठिन परिस्थितियों में किया संघर्ष
इन कठिन परिस्थितियों के बीच कविता ने भविष्य संवारने के लिए होमगार्ड बहाली की दौड़ में हिस्सा लिया. खास बात यह रही कि उन्होंने न तो दौड़ के लिए कोई विशेष पोशाक पहनी और न ही जूते. वह साड़ी पहनकर और नंगे पैर रेतीली जमीन पर दौड़ीं.
कविता की मेहनत और जज्बे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि निर्धारित 10 मिनट की दौड़ उन्होंने महज 6 मिनट में पूरी कर ली. उनकी यह तस्वीर और संघर्ष सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है.
हौसला बनी मिसाल
कविता ने साबित कर दिया कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, हौसला मजबूत हो तो इंसान अपने सपनों की ओर कदम बढ़ा सकता है. दो बच्चों की मां कविता का यह संघर्ष उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणा है, जो मुश्किल परिस्थितियों के आगे हार मान लेते हैं.


